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“बरसाती बारात”….

मुश्किल यहां, टिकने की बात है।
यहां तो , कवियों की बारात है।
अरे , नाच रहे है सब यहां , ऐसे ;
जैसे, बैसाख में हुई बरसात है।

स्वरचित सह मौलिक
पंकज कर्ण
कटिहार

9 Likes · 2 Comments · 437 Views
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