Oct 22, 2016 · 1 min read

बनने दे तू हकीकत सपने को जरा जरा

आने दे तू करीब ,आईने को जरा जरा
सुनने दे जमीर की अपने को जरा जरा
****************************
माना की सपना है हकीकत नही कोई
बनने दे तू हकीकत सपने को जरा जरा
*****************************
कपिल कुमार
21/10/2016

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