Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 Aug 2022 · 1 min read

बड़ी मुश्किल से खुद को संभाल रखे है,

बड़ी मुश्किल से खुद को संभाल रखे है,
हर तरफ अपनो ने ही धोकेबाज़ी के जाल रखे है,
जहर सी होती जा रही थी ज़िंदगी,
बहुत खोजबीन की तो पता चला,
सारे जहरीले सांप तो हमने ही पाल रखे है।

✍️वैष्णवी गुप्ता
कौशांबी

Language: Hindi
Tag: कविता
9 Likes · 12 Comments · 130 Views
You may also like:
✍️शाम की तन्हाई✍️
'अशांत' शेखर
राजनेता
Aditya Prakash
संत कबीरदास✨
Pravesh Shinde
आप कौन है
Sandeep Albela
माटी के पुतले
AMRESH KUMAR VERMA
*संतों की पहचान है (गीत)*
Ravi Prakash
सजना शीतल छांव हैं सजनी
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
साजिशें ही साजिशें...
डॉ.सीमा अग्रवाल
बहाना
Vikas Sharma'Shivaaya'
चिड़िया और जाल
DESH RAJ
"बदलाव की बयार"
Ajit Kumar "Karn"
शूद्रों और स्त्रियों की दुर्दशा
Shekhar Chandra Mitra
चेतना के उच्च तरंग लहराओं रे सॉवरियाँ
Dr.sima
बेजुबां जीव
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
लोग आपन त सभे कहाते नू बा
सन्तोष कुमार विश्वकर्मा 'सूर्य'
चूँ-चूँ चूँ-चूँ आयी चिड़िया
Pt. Brajesh Kumar Nayak
मुर्गा बेचारा...
मनोज कर्ण
पिता अब बुढाने लगे है
n_upadhye
बंदिशे तमाम मेरे हक़ में ...........
लक्ष्मण 'बिजनौरी'
तुम स्वर बन आये हो
Saraswati Bajpai
A pandemic 'Corona'
Buddha Prakash
हर ख़्वाब झूठा है।
Taj Mohammad
टूटे बहुत है हम
D.k Math { ਧਨੇਸ਼ }
वो चाहता है उसे मैं भी लाजवाब कहूँ
Anis Shah
पल
sangeeta beniwal
कृष्ण अर्जुन संवाद
Ravi Yadav
खड़ा बाँस का झुरमुट एक
Vishnu Prasad 'panchotiya'
मधुशाला अभी बाकी है ।।
Prakash juyal 'मुकेश'
कवि
विजय कुमार 'विजय'
इरादा
Shivam Sharma
Loading...