Jan 17, 2022 · 1 min read

~ बंद किताब ~

कुछ ऐसी थी कहानी, ज़िन्दगी की किताब में,
मैं क्या हूँ ये समझने में कुछ वक़्त लग गया,
लिखे थे डायलाग जो, वो मैं बोला कुछ और,
फिर बिखरे थे रिश्ते .. मेरे शब्दों के जाल में,
न किरदार रहा खुद का कोई,
ना कुछ बाकी रहा अब ख्वाब में,
ना शब्द बचे ना रिश्ते, सब थे अनजान से,
ये मेरी कहानी खत्म होने को आई है,
दफ़्न रह जायेगा सब इस…. बंद किताब में….

◆◆©ऋषि सिंह “गूंज”

1 Like · 151 Views
You may also like:
मिटटी
Vikas Sharma'Shivaaya'
जाने कैसी कैद
Saraswati Bajpai
*कथावाचक श्री राजेंद्र प्रसाद पांडेय 【कुंडलिया】*
Ravi Prakash
ईश्वर के संकेत
Dr. Alpa H.
चार काँधे हों मयस्सर......
अश्क चिरैयाकोटी
क्या प्रात है !
Saraswati Bajpai
विश्व विजेता कपिल देव
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
चल अकेला
Vikas Sharma'Shivaaya'
ग़ज़ल
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
poem
पंकज ललितपुर
आसान नहीं हैं "माँ" बनना...
Dr. Alpa H.
हाय गर्मी!
Manoj Kumar Sain
मयंक के जन्मदिन पर बधाई
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
बसन्त बहार
N.ksahu0007@writer
ईद
Khushboo Khatoon
【20】 ** भाई - भाई का प्यार खो गया **
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
यह जिन्दगी है।
Taj Mohammad
**अशुद्ध अछूत - नारी **
DR ARUN KUMAR SHASTRI
प्रकृति
Pt. Brajesh Kumar Nayak
पिता की छांव
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
ग्रीष्म ऋतु भाग ५
Vishnu Prasad 'panchotiya'
शायद...
Dr. Alpa H.
हिन्दी साहित्य का फेसबुकिया काल
मनोज कर्ण
हे ईश्वर!
Anamika Singh
चिट्ठी का जमाना और अध्यापक
Mahender Singh Hans
पिता
Aruna Dogra Sharma
आज फिर
Rashmi Sanjay
सेक्लुरिजम का पाठ
Anamika Singh
कराहती धरती (पृथ्वी दिवस पर)
डॉ. शिव लहरी
स्थापना के 42 वर्ष
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
Loading...