#19 Trending Author
Sep 27, 2016 · 1 min read

फीकी फीकी है हरियाली

नहीं गगन में है वो लाली
फीकी फीकी है हरियाली

अन्न हवा पानी ले दूषित
तन मन ने बीमारी पाली

पैसा खूब कमाया लेकिन
जीवन कितना दिखता जाली

आँखे खोलो मानव जागो
वरना रह जाओगे खाली

पेड़ों को देकर तुम जीवन
पाओगे असली खुशहाली

डॉ अर्चना गुप्ता

2 Comments · 299 Views
You may also like:
"शादी की वर्षगांठ"
rubichetanshukla रुबी चेतन शुक्ला
उसूल
Ray's Gupta
नई सुबह रोज
Prabhudayal Raniwal
आरज़ू है बस ख़ुदा
Dr. Pratibha Mahi
ऐ उम्मीद
सिद्धार्थ गोरखपुरी
1-अश्म पर यह तेरा नाम मैंने लिखा2- अश्म पर मेरा...
Pt. Brajesh Kumar Nayak
बंद हैं भारत में विद्यालय.
Pt. Brajesh Kumar Nayak
हमारे पापा
पाण्डेय चिदानन्द
🙏मॉं कालरात्रि🙏
पंकज कुमार "कर्ण"
पुस्तक समीक्षा -एक थी महुआ
Rashmi Sanjay
साँप की हँसी होती कैसी
AJAY AMITABH SUMAN
नाथूराम गोडसे
Anamika Singh
मुक्तक: युद्ध को विराम दो.!
Prabhudayal Raniwal
यादों का मंजर
Mahesh Tiwari 'Ayen'
चाँद छोड़ आई थी ...
Princu Thakur "usha"
कन्यादान क्यों और किसलिए [भाग८]
Anamika Singh
The Magical Darkness
Manisha Manjari
सूरज काका
Dr Archana Gupta
कन्यादान क्यों और किसलिए [भाग ७]
Anamika Singh
नेकी कर इंटरनेट पर डाल
हरीश सुवासिया
मेरे हाथो में सदा... तेरा हाथ हो..
Dr. Alpa H.
जीने की वजह तो दे
Saraswati Bajpai
अंजान बन जाते हैं।
Taj Mohammad
Born again with love...
Abhineet Mittal
ग़ज़ल
Mahendra Narayan
पिता, इन्टरनेट युग में
Shaily
माफी मैं नहीं मांगता
gurudeenverma198
"एक नई सुबह आयेगी"
पंकज कुमार "कर्ण"
खेतों की मेड़ , खेतों का जीवन
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
हाल ए इश्क।
Taj Mohammad
Loading...