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Jun 24, 2022 · 4 min read

*प्लीज और सॉरी की महिमा {#हास्य_व्यंग्य}*

*प्लीज और सॉरी की महिमा {#हास्य_व्यंग्य}*
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अंग्रेजी में *#प्लीज* और *#सॉरी* दो ऐसे शब्द हैं, जिनसे दुनिया भर का कोई भी काम लिया जा सकता है । *सॉरी* कहने के बाद व्यक्ति के सात खून माफ हो जाते हैं । *प्लीज* कहने के बाद आप किसी को उसका काम करने से शायद ही मना करें।
कुछ लोगों के तो *प्लीज* कहने का अंदाज इतना मार्मिक होता है कि व्यक्ति मना कर ही नहीं सकता। एक सज्जन से किसी सुंदर-सी लड़की ने जब यह कहा “आप मेरा यह भारी-भरकम बैग अपने हाथ में उठाकर बस तक चढ़ा दीजिए ।” तब उन्होंने पहले तो मना कर दिया लेकिन फिर जब उस लड़की ने बहुत प्यार से उनसे *प्लीज !* कहा तो वह यह भी भूल गए कि उनकी रीढ़ की हड्डी में दर्द रहता है । आव देखा न ताव ,भारी-भरकम बैग उठाया और बस तक ले जाकर ही नहीं रुके अपितु बैग को भीड़भाड़ के बीच किसी तरह खिसकाकर आगे बढ़ाया और जब लड़की ने सीट पर बैठने के बाद उन्हें *थैंक्यू* कह दिया तब वह एक वीर-विजेता की तरह मानो कोई वीरता का चक्र लेकर लौट रहे हों ,इस एहसास के साथ बस से उतरे । उतरते के बाद उनकी रीढ़ की हड्डी ने उन्हें सूचित किया “क्यों भाई साहब ! आप किस मोहक मुस्कान में फँस गए ? अब मैं आपको कम से कम एक महीने के लिए बिस्तर पर अवश्य लिटाऊंगी ।” बेचारे एक महीने से बिस्तर पर लेटे हैं और उस दिन को याद कर-करके कोस रहे हैं ,जब उन्होंने *प्लीज* के चक्कर में अपनी पीठ की हालत खराब करवा ली थी । इसे कहते हैं ,अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मारना।
*सॉरी* की तो दुनिया ही अलग है। आप साफ-सुथरे कपड़े पहन कर सड़क पर जा रहे हैं । गली में से गुजर रहे हैं । किसी गृहणी ने आपके ऊपर छत की बालकनी से कूड़ा फेंक दिया ,जो सीधा आपके ऊपर जाकर गिरा । बदले में आपको केवल एक शब्द सुनने को मिलता है, *सॉरी* । आप सिर ऊपर करके नजर उठाते हैं और देखते हैं कि कोई सुंदरी बड़े प्यार से आपको *सॉरी* कह रही है । अब इसके बाद झगड़े की कोई गुंजाइश नहीं बचती ।
अनेक लोग साइकिल की ही नहीं अपितु स्कूटर और बाइक की टक्कर तक से चोट खा चुके हैं , लेकिन चलाने वाले ने जैसे ही *सॉरी* कहा , तब उसके बाद रास्ता चलते चार राहगीर भी यही कहते हैं ” भाई साहब ! अब इन्होंने जब *सॉरी* कह दिया ,तब आप लड़ाई को आगे क्यों बढ़ा रहे हैं ? ” हार कर *सॉरी* को स्वीकार करना पड़ता है और अपना मुँह-मसोसकर आगे बढ़ जाना पड़ता है । असली दिक्कत यही है कि *सॉरी* के बाद विवाद को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता ।
न जाने कितनी बार लोग वक्तव्य देते हैं। उस पर हंगामा होता है और फिर वह *सॉरी* बोल कर सारे मामले को समाप्त कर देते हैं । यह माना जाता है कि *सॉरी* शब्द से सारे मनमुटाव और क्लेश मिट जाते हैं । कुछ लोग *सॉरी* का इस्तेमाल चतुराई के साथ करते हैं । कुछ लोग अकड़ के साथ *सॉरी* बोलते हैं । कुछ लोग *सॉरी* बोलते समय भी अपने चेहरे को गुस्से से लाल-पीला किए रहते हैं । कुछ लोगों को उनके वकील बताते हैं कि तुम्हें *सॉरी* तो बोलना पड़ेगा । वरना बहुत नुकसान होगा । ऐसे में वे लोग *सॉरी* तो बोलते हैं ,मगर उनके *सॉरी* बोलने में भी एक विवशता झलकती है । कुछ लोग इस तरह से *सॉरी* बोलते हैं , मानो *सॉरी* बोलकर कोई बहुत बड़ा एहसान कर रहे हों। कुछ लोगों को दूसरे लोग सार्वजनिक अपील करके *सॉरी* बोलने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। ऐसे में *सॉरी* बोलने का भी एक आधार व्यक्ति को मिल जाता है । वह कहता है “यह तो मैंने अमुक सज्जन के लिहाज में आकर तथा उनका सम्मान रखने के लिए *सॉरी* बोल दिया । वरना तुम तो चीज क्या थे ?”
फिर भी *सॉरी* शब्द का एक अच्छा इतिहास है । इसके कारण अनेक झगड़े वृहद-आकार लेने से बच सके हैं । महाभारत रुकी है और सिर-फुटव्वल होते-होते बच गई है । समय पर *सॉरी* कहना अगर किसी से आ जाए तो वह बहुत भाग्यशाली माना जाता है ,लेकिन कुछ लोग पैदा ही इस मिजाज के होते हैं कि वह *सॉरी* नहीं बोलेंगे । चाहे सिर फूट जाए, टांग टूट जाए ,जन्म-भर मुकदमे बाजी चले और जेल में रहना पड़े ,लेकिन *सॉरी* नहीं बोलते । वह समझते हैं कि *सॉरी* बोलने से उनकी नाक कट जाएगी । अतः वह रोज सुबह को अपनी नाक सही-सलामत होने की बात को चेक करते हैं और फिर दिनभर अपनी नाक पर हाथ रखकर उसे जीवन भर बचा कर चलते हैं । उनके घरवाले ,मित्र और सगे-संबंधी उनके हाथ जोड़ते हैं । पैर पकड़ते हैं और कहते हैं ” *प्लीज !* आप एक बार *सॉरी* बोल दीजिए । सारा मामला शांत हो जाएगा ।” लेकिन कोई-कोई आदमी न जाने जिस मिट्टी का बना हुआ होता है ,वह *सॉरी* नहीं बोलता । ऐसे में *प्लीज* शब्द की भारी बेज्जती होती है। उसकी सार्थकता भी समाप्त हो जाती है। *प्लीज* बेअसर नजर आता है । *सॉरी* न बोलने वाले की भी लुटिया अलग डूबती है और उसकी न जाने कितने गुना बेइज्जती *प्लीज* को अनदेखा करके *सॉरी* न बोलने के कारण होती है ।
कुल मिलाकर अगर जिंदगी को मजे से जीना है तो दो शब्द सीख लो । एक *प्लीज* ,दूसरा *सॉरी* । कब कहां क्या बोलना है ,यह तुम्हारे ऊपर निर्भर करता है ! मौका देखकर *प्लीज* बोलकर काम निकालो अर्थात अपना उल्लू सीधा करो और जब फँस जाओ तो *सॉरी* बोलकर पिंड छुड़ा लो और पतली गली से निकल जाओ ।
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*लेखक : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*

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