पैगाम

हवाओं से मिला पैगाम मै घबरा गया ।
मुझे तुमने दी आवाज लो मै आ गया ।।

कब से लगाये था आस तेरे मिलन की
जब आई वो घडी देख मै शरमा गया ।।

जरुरत क्या मुझे अब किसी कायनात की
जमाने की खुबसूरत सौगात आज में पा गया ।।

अगर जलते है दुनिया वाले तो जलने दे
छोड़ जग की रवायत जीने का मजा आ गया ।।

किसको सुने, किसको चुने ‘धर्म’ शंशय में
बस ले “नानक” का नाम मै फकीरा आ गया।।



डी के निवातियाँ
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