Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Feb 24, 2019 · 2 min read

पैकेज

सुबह का वक्त था। एक महानगर के एक घर में मनीष अपने लानॅ में बैठे अपने पडोसी सुरेंद्र चौबे से बातें कर रहे थे।सुरेंद्र चौबे जी सुबह की सैर से लौटते हुए मनीष प्रसाद जी के पास कभी कभी बैठ जाया करते थे। अचानक मनीष प्रसाद ने अपने बेटे को आवाज दी, ” अरे बेटा जरा एक गिलास पानी तो दे दो।”
“पापा जी आप देख नही रहे मुझे आफिस के लिए देर हो रही है और पिंकी भी आफिस के लिए तैयार हो रही है। मेड बच्चों के लिए लंच पैक कर रही है। स्कूल की बस आने वाली है। थोडा रूको मेड दे जायेगी पानी।” उनके बेटे सिद्धार्थ का उत्तर आया। यह सब सुनना था कि सुरेंद्र चौबे जी बोल पडे,”भाई साहब मैं कल ही अपने दामाद को घर से होकर आया हूँ। क्या बताऊँ वहाँ भी सब बिजी हैं। किसी के पास टाइम ही नही है किसी को कुछ देने के लिए। सब नौकरी के चक्कर में ऐसे उलझे हैं कि अपने बुजुर्गों का तो दूर अपने बीवी बच्चों का भी दूर अपना भी ठीक से ख्याल नही रख पाते। अच्छा पैकेज लेने के चक्कर में सारा समय नौकरी में ही चला जाता है। सालाना इनकम ही हाथ में आती है जिससे जेब तो भर जाती है पर आदमी रहता है हमेशा खाली। उसके पास न टाइम होता है और न किसी की चिंता।”
मुझे माफ करना सुरेंद्र जी मैं ही आपको सलाह देता था कि शादी केवल ‘पैकेज’ देखकर ही करनी चाहिए। रिश्ते के लिए सबसे जरूरी चीज यही है। बहु ढूंढनी हो तो पैकेज दामाद ढूंढना हो तो पैकेज। ये पैकेज न जाने हमें कहाँ लेकर जायेगा। ये हमारा ही सामान पैक करवा कर छोडेगा।” यह कहते हुए मनीष प्रसाद की आखों में पश्चात्ताप के आसूं आ गये। और सुरेन्द्र जी सोच रहे थे कि काश यह बात सब लोग समझ जाये तो कितना अच्छा हो।

अशोक छाबडा
17 अक्तूबर 2016

1 Comment · 173 Views
You may also like:
फूल की महक
DESH RAJ
कोशिशें हों कि भूख मिट जाए ।
Dr fauzia Naseem shad
अधजल गगरी छलकत जाए
Vishnu Prasad 'panchotiya'
ये पहाड़ कायम है रहते ।
Buddha Prakash
मातृदिवस
Dr Archana Gupta
✍️हमसे लिपट गये✍️
'अशांत' शेखर
चाहत की हद।
Taj Mohammad
गम होते हैं।
Taj Mohammad
*अंग्रेजों के सिक्कों में झाँकता इतिहास*
Ravi Prakash
तो क्या होगा?
Shekhar Chandra Mitra
गीतायाः पाठ:।
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
चेहरा अश्कों से नम था
Taj Mohammad
ऊँच-नीच के कपाट ।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
दोषस्य ज्ञानं निर्दोषं एव भवति
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
बुढ़ापे में अभी भी मजे लेता हूं
Ram Krishan Rastogi
"कुछ तुम बदलो कुछ हम बदलें"
Ajit Kumar "Karn"
मैं आजाद भारत बोल रहा हूँ
VINOD KUMAR CHAUHAN
हौसले मेरे
Dr fauzia Naseem shad
कलम
AMRESH KUMAR VERMA
काँटा और गुलाब
Anamika Singh
✍️शाम की तन्हाई✍️
'अशांत' शेखर
तुमसे इश्क कर रहे हैं।
Taj Mohammad
✍️मिसाले✍️
'अशांत' शेखर
आजादी की कभी शाम ना हम होने देंगे
Ram Krishan Rastogi
तपिश
SEEMA SHARMA
💐💐मृत्यु: प्रतिक्षणं समया आगच्छति💐💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
तबाही
Gaurav Dehariya साहित्य गौरव
बुंदेली दोहे
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
एक कतरा मोहब्बत
श्री रमण 'श्रीपद्'
नारियां
AMRESH KUMAR VERMA
Loading...