Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Apr 19, 2022 · 1 min read

पेड़ – बाल कविता

हरे – भरे से रहते खड़े,
हठ अपनी पर वो अड़े।

आँधी, वर्षा या तूफान,
सबके समक्ष सीना तान।।

दूर गगन से करते बातें,
धरती में हैं जड़ें जमाते।

देते मानव को यह सीख,
शीश उठाकर जीना सीख।।

वृक्षारोपण सब अपनायें।
धरती पर नवजीवन लायें।

पर्यावरण जब संरक्षित होगा,
जीवन सबका सुरक्षित होगा।।

रचनाकार :- कंचन खन्ना, कोठीवाल नगर,
मुरादाबाद, (उ०प्र०, भारत)।
सर्वाधिकार, सुरक्षित (रचनाकार)।
दिनांक :- ०२/०५/२०१८.

1 Like · 6 Comments · 170 Views
You may also like:
✍️पुरानी रसोई✍️
"अशांत" शेखर
ज़िक्र तेरा
Dr fauzia Naseem shad
नव सूर्योदय
AMRESH KUMAR VERMA
गुमनामी
DR ARUN KUMAR SHASTRI
जाति- पाति, भेद- भाव
AMRESH KUMAR VERMA
नागफनी बो रहे लोग
शेख़ जाफ़र खान
कोई हल नहीं मिलता रोने और रुलाने से।
Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI
"अष्टांग योग"
पंकज कुमार "कर्ण"
पिताजी
विनोद शर्मा सागर
स्वर्गीय श्री पुष्पेंद्र वर्णवाल जी का एक पत्र : मधुर...
Ravi Prakash
उस रब का शुक्र🙏
Anjana Jain
मरने के बाद।
Taj Mohammad
अख़बार
आकाश महेशपुरी
पिता
Kanchan Khanna
✍️डर काहे का..!✍️
"अशांत" शेखर
उस निरोगी का रोग
gurudeenverma198
मां शारदा
AMRESH KUMAR VERMA
अजीब कशमकश
Anjana Jain
मुझसे बचकर वह अब जायेगा कहां
Ram Krishan Rastogi
आज के नौजवान
DESH RAJ
होली
AMRESH KUMAR VERMA
जिन्दगी मे कोहरा
Anamika Singh
नवजीवन
AMRESH KUMAR VERMA
वेदों की जननी... नमन तुझे,
मनोज कर्ण
मुस्कुराइये.....
Chandra Prakash Patel
चलों मदीने को जाते हैं।
Taj Mohammad
जो चाहे कर सकता है
Alok kumar Mishra
रूखा रे ! यह झाड़ / (गर्मी का नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
बस तेरे लिए है
bhandari lokesh
खेसारी लाल बानी
Ranjeet Kumar
Loading...