Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

पितृ स्तुति

पालक पोषक है पिता,देव तुल्य सम मेव।
कर्ता धर्ता आप हैं,पिता ब्रह्म मम एव।

मात पिता की छांव में,जीवन स्वर्ग समान।

एक सत्य ब्रह्मांश है, पिता तुल्य त्वं देव।

डा.प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
लखनऊ।

12 Likes · 14 Comments · 114 Views
You may also like:
हमें अब राम के पदचिन्ह पर चलकर दिखाना है
Dr Archana Gupta
मरने के बाद।
Taj Mohammad
【24】लिखना नहीं चाहता था [ कोरोना ]
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
✍️✍️ठोकर✍️✍️
"अशांत" शेखर
एक गलती ( लघु कथा)
Ravi Prakash
✍️मेरा साया छूकर गया✍️
"अशांत" शेखर
**अशुद्ध अछूत - नारी **
DR ARUN KUMAR SHASTRI
किताब।
Amber Srivastava
कुछ ऐसे बिखरना चाहती हूँ।
Saraswati Bajpai
यह कौन सा विधान है
Vishnu Prasad 'panchotiya'
एक दौर था हम भी आशिक हुआ करते थे
Krishan Singh
✍️कही हजार रंग है जिंदगी के✍️
"अशांत" शेखर
सब खुदा हो गये
"अशांत" शेखर
रिश्ते
Saraswati Bajpai
मिलन की तड़प
Dr. Alpa H. Amin
पर्यावरण पच्चीसी
मधुसूदन गौतम
कैसा हो सरपंच हमारा / (समसामयिक गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
कब आओगे
dks.lhp
धार्मिक आस्था एवं धार्मिक उन्माद !
Shyam Sundar Subramanian
हवाओं को क्या पता
Anuj yadav
सिंधु का विस्तार देखो
surenderpal vaidya
✍️डार्क इमेज...!✍️
"अशांत" शेखर
स्याह रात ने पंख फैलाए, घनघोर अँधेरा काफी है।
Manisha Manjari
जुद़ा किनारे हो गये
शेख़ जाफ़र खान
" शौक बड़ी चीज़ है या मजबूरी "
Dr Meenu Poonia
"सूखा गुलाब का फूल"
Ajit Kumar "Karn"
एक हरे भरे गुलशन का सपना
ओनिका सेतिया 'अनु '
मृगतृष्णा / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
मैं और मांझी
Saraswati Bajpai
श्रीराम धरा पर आए थे
सिद्धार्थ गोरखपुरी
Loading...