Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
Jun 8, 2022 · 2 min read

मेरे पिता से बेहतर कोई नहीं

मां बताती हैं…
वीडियो कॉल पर बात भी करवाती हैं
कमजोर हो गए हैं पिताजी
कुछ नहीं कहते, बस ताकते रहते
जीवन की सांध्य बेला में
शरीर से ही नहीं, याददाश्त से भी
उन्हें नहीं रहता अब कुछ भी याद
तभी तो भूल गए मेरी सारी शरारतें, गलतियां
और उनकी मर्जी के बिना किया गया विवाह
अक्सर पिताओं को याद रहती हैं
अपने बच्चों की गलतियां,
लेकिन मां ने बताया…
मेरे आने की खबर से, पिता को
अचानक से याद आई है अभी अभी
मेरी पसंद की नानखटाई और छोले भटूरे
पानीपूरी, जलेबी कचौरी की दुकान
मेरी सारी पसंद, नापसंद, नहीं भूले वह
घर लौटते हुए जरूर कुछ लाना
क्योंकि उन्हें पता था, हम बच्चों की निगाह
उनके साथ लिए बैग पर होती थी
जिसमें होती खट्टी मीठी लेमनचूस गोलियां
जिन्हें अब देना चाहते हैं, मेरे बच्चों को
मां ने बताया…
समय के साथ कमजोर पड़ी है नजर
लेकिन फिर भी देखते हैं, पुराने एलबम को
जिस में मुझे गले से लगाए खड़े हैं
और हाथ फेर कर महसूस करते हैं
मानो मैं उनके पास ही हूं
मेरे बाहर जाने पर, कुछ नहीं कहा
बस चुपचाप मेरे सारे इंतजाम करते रहे
मेरे लिए अनेक चिंताएं, अनकही दुआएं
देखा है कोरोना में भाग दौड़ करते हुए
अब लौटा हूं,
विदेश ना जाने के लिए
क्योंकि उन्हें नहीं देख सकता
इस तरह निरीह सा, जो थे मेरे आदर्श
कुछ भी कर सकने की सामर्थ्य वाले
अनमोल विरासत से हैं मेरे लिए
कमजोर तो हो गए हैं
लेकिन, मां ने बताया…
मेरे आने की खबर से,
मानो मिल गई है जीवनीशक्ति
अब भी मेरे इंतजार में देख कर आये हैं
कड़ी धूप में सड़क की छोर तक
मैं भी एक पिता ही हूं
लेकिन नहीं हूं अपने पिता जैसा
क्षमाशील और बच्चों की खुशी के लिए
अपने जज्बातों को छुपाने वाला
इतनी परवाह करने वाला
ये सबक ही हैं,
जो नहीं पढ़ाए जाते किसी किताब में
बस सीखते हैं पीढ़ी दर पीढ़ी
बड़ी देर से समझ आते हैं
और सोचता हूं कि
संसार में कोई भी पिता
अपने पिता से बेहतर नहीं हो सकता
__ मनु वाशिष्ठ, कोटा जंक्शन राजस्थान

3 Likes · 4 Comments · 107 Views
You may also like:
श्रेय एवं प्रेय मार्ग
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
One should not commit suicide !
Buddha Prakash
कभी-कभी / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
छोटा-सा परिवार
श्री रमण 'श्रीपद्'
आपसा हम जो दिल
Dr fauzia Naseem shad
ढाई आखर प्रेम का
श्री रमण 'श्रीपद्'
A wise man 'The Ambedkar'
Buddha Prakash
रूठ गई हैं बरखा रानी
Dr Archana Gupta
पीला पड़ा लाल तरबूज़ / (गर्मी का गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
✍️One liner quotes✍️
Vaishnavi Gupta
प्रकृति के चंचल नयन
मनोज कर्ण
*!* दिल तो बच्चा है जी *!*
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
प्रात का निर्मल पहर है
मनोज कर्ण
✍️बचपन का ज़माना ✍️
Vaishnavi Gupta
संविदा की नौकरी का दर्द
आकाश महेशपुरी
अब भी श्रम करती है वृद्धा / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
सूरज से मनुहार (ग्रीष्म-गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
ऐसे थे मेरे पिता
Minal Aggarwal
पिता जी का आशीर्वाद है !
Kuldeep mishra (KD)
पितृ वंदना
संजीव शुक्ल 'सचिन'
आइना हूं मैं
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
चंदा मामा बाल कविता
Ram Krishan Rastogi
कुछ पल का है तमाशा
Dr fauzia Naseem shad
रफ्तार
Anamika Singh
तुमसे कोई शिकायत नही
Ram Krishan Rastogi
रंग हरा सावन का
श्री रमण 'श्रीपद्'
मर्द को भी दर्द होता है
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
प्यार
Anamika Singh
पिता
Dr.Priya Soni Khare
गाऊँ तेरी महिमा का गान (हरिशयन एकादशी विशेष)
श्री रमण 'श्रीपद्'
Loading...