Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

पिता हैं छाँव जैसे

धूप है दुनिया पिता हैं छाँव जैसे।
शह्र की तनहाइयों में गाँव जैसे।

कोई भी कठिनाई कैसे छू सकेगी।
उँगली उनके हाथ में जब तक रहेगी।
वो अभावों में मेरी उपलब्धि हरदम।
साथ उनके ही नियति उन्नति लिखेगी।

राह में जीवन की मेरे पाँव जैसे।
धूप है दुनिया पिता हैं छाँव जैसे।

मुझसे मेरे भाग्य के दो पाद आगे।
चित्त की जागृति में वो हर वक्त जागे।
एक सूची जो कि संघर्षी रही है।
रिश्तों के नाजुक सम्हाले हैं वो धागे।

स्वप्न के साकार की वो ठाँव जैसे।
धूप है दुनिया पिता हैं छाँव जैसे।

उन निगाहों ने गुजारे दौर सारे।
बीज से फलदार तरु के तौर सारे।
वो हृदय जो नेह में लिपटा हुआ है।
सामने उसके नीरस मन और सारे।

वो जो मुझमें जी रहा हर दाँव जैसे।
धूप है दुनिया पिता हैं छाँव जैसे।

अंकित शर्मा ‘इषुप्रिय’

3 Likes · 4 Comments · 193 Views
You may also like:
✍️शाम की तन्हाई✍️
'अशांत' शेखर
शोहरत और बंदर
सूर्यकांत द्विवेदी
आवत हिय हरषै नहीं नैनन नहीं स्नेह।
sheelasingh19544 Sheela Singh
★HAPPY FATHER'S DAY ★
KAMAL THAKUR
थिरक उठें जन जन,
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
अश्रुपात्र A glass of years भाग 8
Dr. Meenakshi Sharma
ग़ज़ल
Mahendra Narayan
अग्रवाल समाज और स्वाधीनता संग्राम( 1857 1947)
Ravi Prakash
गिरधर तुम आओ
शेख़ जाफ़र खान
मेरे पिता
मनमोहन लाल गुप्ता अंजुम
मजदूर- ए- औरत
AMRESH KUMAR VERMA
One should not commit suicide !
Buddha Prakash
The Journey of this heartbeat.
Manisha Manjari
एक उलझा सवाल।
Taj Mohammad
प्यार करते हो मुझे तुम तो यही उपहार देना
Shivkumar Bilagrami
✍️सब खुदा हो गये✍️
'अशांत' शेखर
बचपन को जिसने अपने
Dr fauzia Naseem shad
सावन का मौसम आया
Anamika Singh
“ অখনো মিথিলা কানি রহল ”
DrLakshman Jha Parimal
कलम कि दर्द
Hareram कुमार प्रीतम
✍️जिंदगी की सुबह✍️
'अशांत' शेखर
नफ़्स
निकेश कुमार ठाकुर
हाँ, अब मैं ऐसा ही हूँ
gurudeenverma198
हम आजाद पंछी
Anamika Singh
✍️धुप में है साया✍️
'अशांत' शेखर
*"यूँ ही कुछ भी नही बदलता"*
Shashi kala vyas
# बोरे बासी दिवस /मजदूर दिवस....
Chinta netam " मन "
“ गलत प्रयोग से “ अग्निपथ “ नहीं बनता बल्कि...
DrLakshman Jha Parimal
Only for L
श्याम सिंह बिष्ट
अल्फाज़ ए ताज भाग-4
Taj Mohammad
Loading...