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पिता मेरे /

:: पिता मेरे ::
—————-
क्या सही है ? क्या गलत है ?
जानते थे पिता मेरे ।

दे रही थी एक पैनी
दृष्टि हम पर रोज पहरा ।
मुस्कुराहट में छिपाकर
ज़िंदगी का दर्द गहरा ।
आज उसकी याद है नम ।
याद से आबाद हैं हम ।
भूल मेरी क्षमा करते,
प्यार में ही रमा करते ।
चूक होने से ही पहले
भाँपते थे पिता मेरे ।

कौन अपना ? क्या पराया ?
हाथ हर-पल खुला रखते ।
भूल कुण्ठा,वर्जनाएँ
हृदय अपना धुला रखते ।
तौर-तरीके, सीख देने,
सोचकर ही पाँव रखते ।
सुख औ’ दुख की
जटिल दूरी नापते थे पिता मेरे ।

क्या सही है ? क्या गलत है ?
जानते थे पिता मेरे ।

— ईश्वर दयाल गोस्वामी
छिरारी (रहली),सागर
मध्यप्रदेश ।
मोबाइल नंबर- 8463884927

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