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17 Apr 2022 · 1 min read

पिता तुम हमारे

लाये जमी पर दिखाए नज़ारे
जहाँ से हो प्यारे पिता तुम हमारे

वो बचपन हमारा बड़ा ही सलौना
जो माँगा था हमने वो पाया खिलौना

सुनाई थी लोरी और काँधे बिठाया
ले बाँहों के झूले में तुमने झुलाया

पकड़ मेरी उँगली सिखाया था चलना
तुम्हें याद होगा हमारा मचलना

करी जिद्द हमारी सदा तुमने पूरी
यकायक बड़ी फिर हमारी वो दूरी

कदम जब जवानी में हमने रखा था
अज़ब ही अनौखा पिया इक चुना था

बना मुझको दुल्हन बिठाया था डोली
तभी बाउजी मैं पिया की थी होली

सजा आशियाना चली में पिया के
रहे संग बाती ज्यों अपने दिया के

सबक तब तुम्हारा ही सब काम आया
दुआओं से तुमरी घरौंदा सजाया

सभी गुण तुम्हारे विरासत में पाये
अमल कर तभी तो जहाँ जीत पाये

न शिकवा शिकायत न कोई गिला है
मिला ना किसी को वो मुझको मिला है

तभी तो लड़े हम अँधेरों से जाकर
सिले ज़ख्म लाखों सदा चोट खाकर

तुमी से है सीखा गुलों को सँजोना
ख़ुशी के ये मोती भी चुन चुन पिरोना

जमी से फलक तक सभी चाँद तारे
गवाह बाउजी ये हमारे तुम्हारे

है रब की ये रहमत ख़ुदा की खुदाई
तभी तो मैं तेरी ही बिटिया कहाई
© डॉ० प्रतिभा ‘माही’

Language: Hindi
Tag: कविता
11 Likes · 18 Comments · 360 Views
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