“पिताश्री”

गर्दन उठा कर , शान से जीना सिखा दिया !
करता हूं नमन भगवान्; मुझे ऐसा पिता दिया!
नारी का सम्मान,गरीबों-खातिर लड़ने का गुण,
अपने खून के इक कतरे, सब कुछ मिला दिया !
(पिताश्री को समर्पित)

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