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” पावस-पावनि “

वर दे, “पावस-पावनि”, वर दे..!

रिमझिम सावन, मस्त फुहारों से बरबस,
मन को भी, तन सँग पुलकित कर दे।
इन्द्र धनुष से स्वप्न, समाहित हो जाएँ,
दु:ख, कष्ट, पल मेँ ही सब, विस्मृत कर दे।।
वर दे, “पावस-पावनि”, वर दे…!

शस्य श्यामला, शोभित धरती हो जाए,
एक बार जी भर, जल-थल कर दे।
पशु-पक्षी, तृष्णा से हैं बेहाल हुए,
कण-कण मेँ, सँतृप्ति भाव भर दे।।
वर दे, “पावस-पावनि”, वर दे…!

दमक, दामिनी, दुति, चपला, रह-रह चमके,
निस्पृह मन मेँ, चाहत की आभा भर दे।
हो विभोर तितलियोँ, वृन्द भ्रमरों के सँग,
मन, मयूर सा नृत्य, सहज कर ले।।
वर दे, “पावस-पावनि”, वर दे…!

ओ मेघा कजरारे, दिखते मतवाले,
विरह व्यथा, प्रियतम को भी कह दे।
दृग सागर हैं, मानो कोई थाह नहीं,
मन मेँ मेरे, कुछ ढाढ़स भर दे।।
वर दे, “पावस-पावनि”, वर दे…!

धुले कालिमा, लुप्त रुदन सब हो जाए,
व्याधि, रुग्णता, जग की सब हर ले।
“आशा”अरु उत्साह, सभी मेँ फिर पनपे,
घृणा, द्वेष, भय दूर सकल कर दे।।
वर दे, “पावस-पावनि”, वर दे…!

——-//——-//——-//——–//——//——-

रचयिता-

Dr.asha kumar rastogi
M.D.(Medicine),DTCD
Ex.Senior Consultant Physician,district hospital, Moradabad.
Presently working as Consultant Physician and Cardiologist,sri Dwarika hospital,near sbi Muhamdi,dist Lakhimpur kheri U.P. 262804 M.9415559964

120 Likes · 274 Comments · 2914 Views
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