पानी

कभी किसी की आँखों से बरसा है,
कभी आसमान से पानी।

ज़रा संभाल कर रखना,
मिट न जाए इस जहां से पानी।

मोती इसकी आगोश में पलते है,
इसके दम पर ही हमारे प्राण चलते हैं।

अब बरसे तो पलकों पर थाम कर रखना,
कभी खो न जाए हमारी आँख से पानी।

बादलों की आँखें सूख गई अगर,
फिर न बरसेगा आसमान से पानी।
**** ****

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