पाँच मुक्तक

पाँच मुक्तक
1-
डरे बच्चे व बूढ़े और दहशत हम जवानों में
असंभव है कि सो पाएं दरकते इन मकानों में
धरा ने यूँ है झकझोरा कलेजा मुँह को आ जाये
कि अब तो मौत ही दिखती यहाँ हर पल ठिकानों में
2-
दानवों ने दाव कैसे दे दिए
पेट पर भी पाँव जैसे दे दिए
जिन्दगी का कुछ भरोसा है नहीं
घाव पर भी घाव ऐसे दे दिए
3-
है भरोसा जिन्दगी में अब कहाँ
मिल सकेंगी सांस तन को रब कहाँ
जब खुशी पर हर कदम पहरा लगा
ख्वाहिशों के फूल खिलते कब कहाँ
4-
है नजर दुनिया की मेरी चाल पर
हँस रहे हो तुम भी मेरे हाल पर
है खुशी तुझको तो मेरे पास आ
खींच ले दो-चार चावुक खाल पर
5-
दिवाली भी मनाना अब नहीं आसान है यारों
नहीं अब एक भी सस्ता मिले सामान है यारों
कि रोजी भी हमारी छीन कर है ले गया कोई
मुबारक हो उसे जो भी यहाँ धनवान है यारों

– आकाश महेशपुरी

227 Views
You may also like:
मैं पिता हूं।
Taj Mohammad
=*बुराई का अन्त*=
Prabhudayal Raniwal
जलियांवाला बाग
Shriyansh Gupta
ऐसे थे मेरे पिता
Minal Aggarwal
"हमारी यारी वही है पुरानी"
Dr. Alpa H.
उपहार की भेंट
Buddha Prakash
*पुस्तक का नाम : अँजुरी भर गीत* (पुस्तक समीक्षा)
Ravi Prakash
शासन वही करता है
gurudeenverma198
*सदा तुम्हारा मुख नंदी शिव की ही ओर रहा है...
Ravi Prakash
प्रकृति का अंदाज.....
Dr. Alpa H.
लिहाज़
पंकज कुमार "कर्ण"
【19】 मधुमक्खी
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
अब कहां कोई।
Taj Mohammad
रोग ने कितना अकेला कर दिया
Dr Archana Gupta
" ओ मेरी प्यारी माँ "
कुलदीप दहिया "मरजाणा दीप"
मैं भारत हूँ
Dr. Sunita Singh
ग़ज़ल
Nityanand Vajpayee
ममत्व की माँ
Raju Gajbhiye
🍀🌺प्रेम की राह पर-43🌺🍀
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
वेलेंटाइन स्पेशल (5)
N.ksahu0007@writer
* तुम्हारा ऐहसास *
Dr. Alpa H.
Kavita Nahi hun mai
Shyam Pandey
💐प्रेम की राह पर-26💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
सबसे बड़ा सवाल मुँहवे ताकत रहे
आकाश महेशपुरी
जीने की चाहत है सीने में
Krishan Singh
ऐ जिंदगी कितने दाँव सिखाती हैं
Dr. Alpa H.
माँ गंगा
Anamika Singh
ना कर गुरुर जिंदगी पर इतना भी
VINOD KUMAR CHAUHAN
रावण - विभीषण संवाद (मेरी कल्पना)
Anamika Singh
बाबा ब्याह ना देना,,,
Taj Mohammad
Loading...