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” ——————————————– पलकें लगे सजल सी ” !!

मन की बातें कही ना जाए , खामोशी में पलती !
यही वेदना अगर मुखर हो , अश्कों में है ढलती !!

सजना धजना कोरा लगता , आसमान खाली सा !
कांधे लदी बहारें मानो , जान बूझ हैं छलती !!

बंजारिन सा डेरा खाली , हंसी आंख से ओझल !
अधर अनमने आज लगे हैं , खुशियां लगे फिसलती !!

आहट कानों पर ना ठहरे , खोयी खोयी सिहरन !
काया हुई शिथिल है ऐसे , पल पल रंग बदलती !!

पवन संदेशे आते जाते , भूल गये लहराना !
इतराने वाले पल रूठे , पलकें लगे सजल सी !!

खुशहाली आनी जानी है , इतना तो हम जानें !
तुम वादे तोड़ो अपने तो , नीयत लगे मचलती !!

अभी लालसा कायम सी है , कल हों सपने पूरे !
आस जगी है नयी नयी सी , तबियत लगे संभलती !!

बृज व्यास

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