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5 Aug 2022 · 1 min read

पराई

पराई

हक नहीं कुछ भी कहने का और अर्धांगिनी कहीं जाती है,
गठजोड़ों की डोर से बस बन्धी चलीं जाती है।।
इतने साल बाद भी विश्वास तो ना जीत पाई,
पराई घर की आज भी तो कहीं जातीं है।।

सीमा टेलर ‘तू है ना’ (छिम़पीयान‌‌‌ लम्बोर)

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