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21 Aug 2022 · 1 min read

न जाने क्यों

न जाने क्यों
मेरे दिल को
तसल्ली न
मिले
कि मर के
मीत को
जैसे
ज़िन्दगी
न मिले कहीं पे
दर्द कराहा
कहीं पे
अश्क़ गिरे
हों जितने
खोये थे
अपने
हमें कहीं न मिले!

डाॅ फौज़िया नसीम शाद

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