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11 Feb 2023 · 1 min read

💐अज्ञात के प्रति-57💐

न ग़ुरूर करिये,न गुमान करिये,बस मुस्कुराइये।
फ़क़त मिट्टी के सिवाए किसी का कुछ नहीं बचा।।

©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Hindi
81 Views
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