Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

निवर्तमान परिवेश

#विधा – सरसी छंद
***************************************
निवर्तमान परिवेश
“””””””””””””””””””””””””””'”””
विषधर जैसे कुछ मानव हैं, औ है इनका वंश।
चाहे जितना दूध पिला दो, मारेंगे ये दंश।।
बाह्य दिखावा ऐसा जैसे, दिखता सुंदर हंस।
अंतरमन कालीख भरे हैं, जैसे रावण कंस।।

वनिता का सम्मान न करता, है जिसका ये अंश।
ऐसे कुल घालक ही भाई, लेकर डूबें वंश।।
बुरा कर्म करते जाते है, बनकर रहता संत।
जगजाहिर है बुरे कर्म का, होत बुरा ही अंत।।

करो कर्म कुछ ऐसा जग में, द्युति मार्तण्ड समान।
बढें बंश कुल की मर्यादा, जगत मिले सम्मान।।
मनुज रूप लेकर आये तुम, देवो के तुम अंश।
पवनासन बन क्यो देते हो, मानवता को दंश।।
——स्वरचित, स्वप्रमाणित
✍️पं.संजीव शुक्ल “सचिन”
मुसहरवा (मंशानगर)
पश्चिमी चम्पारण, बिहार

1 Like · 131 Views
You may also like:
सबको दुनियां और मंजिल से मिलाता है पिता।
सत्य कुमार प्रेमी
किसे फर्क पड़ता है।(कविता)
sangeeta beniwal
“NEW ABORTION LAW IN AMERICA SNATCHES THE RIGHT OF WOMEN”
DrLakshman Jha Parimal
बरसात
Ashwani Kumar Jaiswal
सिरत को सजाओं
Anamika Singh
लकड़ी में लड़की / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
खेसारी लाल बानी
Ranjeet Kumar
✍️सब खुदा हो गये✍️
'अशांत' शेखर
पानी की कहानी, मेरी जुबानी
Anamika Singh
पुराने खत
sangeeta beniwal
जो किसी से ख़फ़ा
Dr fauzia Naseem shad
ईद की दिली मुबारक बाद
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
आज आदमी क्या क्या भूल गया है
Ram Krishan Rastogi
✍️किरदार ✍️
'अशांत' शेखर
गीत - मैं अकेला दीप हूं
Shivkumar Bilagrami
दर्द पन्नों पर उतारा है
Seema Tuhaina
परशुराम कर्ण संवाद
Utsav Kumar Aarya
सरकारी निजीकरण।
Taj Mohammad
'मेरी यादों में अब तक वे लम्हे बसे'
Rashmi Sanjay
गम तेरे थे।
Taj Mohammad
मेरी चुनरिया
DESH RAJ
द माउंट मैन: दशरथ मांझी
Jyoti Khari
खंडहर हुई यादें
VINOD KUMAR CHAUHAN
मां का आंचल
VINOD KUMAR CHAUHAN
पढ़े लिखे खाली घूमे,अनपढ़ करे राज (हास्य व्यंग)
Ram Krishan Rastogi
तमाशाई बन गए हैं।
Taj Mohammad
दर्द से खुद को
Dr fauzia Naseem shad
कबीर साहेब की शिक्षाएं
vikash Kumar Nidan
कौन होता है कवि
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
और जीना चाहता हूं मैं
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
Loading...