Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Dec 2021 · 2 min read

” ना रही पहले आली हवा “

पहले जैसा गाम रहा ना
ना पहले जैसा बाणा
बाजरे की रोटी भूले हम
बर्गर हो गया खाणा,
लस्सी, दही की हांडी फूटी
मन भाया कोलड्रिंक जंचाणा
देशी दूध की फितरत भूले
बस बोर्नविटा, हॉर्लिक्स मिलाणा,
होली, दिवाली की रौनक फीकी
बदल्या यारां का फोन मिलाणा
काम पड़े जब ही बात करणी
भूल गए ठ्ठाली वक्त बिताणा,
डाक मारें स्विमिंग पूल मैं
खू गया जोहड़ का नहाणा,
जग आर किटली जगहां छोड़गी
लाग्या थैली में दूध मंगाणा,
अलूणी घी की सुगन्ध भूल्ग्या
शुरू डेयरी घी रोटियां के लगाणा
फाग आली ईब मस्ती रही ना
ना भाभी का कोरड़ा गिरकाणा,
जांडी नीचे आली रोटी भी खुगी
ना दिखे गजबण का टोकणी ठ्ठाणा
गोबर आला बड़कुला खुग्या
बस चसबूझ तैं काम चलाणा,
मोम आली मोमबत्ती भी लुखगी
शुरु डिजिटल चांदणा कराणा
दीवा, बाती ईब बासी मारें
चालू बैटरी तैं रास्ता दिखाणा,
चप्पल, जूती कूण मैं सड़गी
बस फैशन मैं सबने लहराणा
दामण, चुंदड़ी फोटुआ मैं लुखगी
मोरकां की पैंट पहरकीं दिखाणा,
डफ आर ढोलक कोनी बाजे ईब
बस डीजे का रिमिक्स गाणा
गत्ता आर बीजणा भी खुग्या
लाग्या एसी तैं मौसम बदलाणा,
घूंघट की फटकार रही ना
ना लुगाइयों का गीत गाणा
मास्टरां की वा मार रही ना
ना टाबरां का खोआ मटकाणा,
छांद आली पॉली रही ना
ना ट्यूबल तैं पाणी भरके लाणा
सांस आर हवा सारी होगी बनावटी
लागै न्यू जणु घुट घुट की मर जाणा,
सिली सिली बाल आर कच्ची गाल होंदी
याद बहोत आव मीनू कै जमाना पुराणा
हे भगवान फेर तैं उसा ए गाम बनादे
शुरू होगा सै ईब आंखयां तैं पाणी आणा।

Dr.Meenu Poonia jaipur

Language: Hindi
Tag: कविता
4 Likes · 1 Comment · 646 Views
You may also like:
*** " वक़्त : ठहर जरा.. साथ चलते हैं....! "...
VEDANTA PATEL
मेहनत का फल
Buddha Prakash
बरसात
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
सदा सुहागन रहो
VINOD KUMAR CHAUHAN
Inspiration - a poem
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
भारतीय रेल
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
ख़्वाहिश है की फिर तुझसे मुलाक़ात ना हो, राहें हमारी...
Manisha Manjari
खूबसूरत तोहफा।
Taj Mohammad
💔💔...broken
Palak Shreya
مستان میاں
Shivkumar Bilagrami
हाँ प्राण तुझे चलना होगा
Ashok deep
पितृपक्ष_विशेष
संजीव शुक्ल 'सचिन'
” हृदय से ना जुड़ सके तो मित्र कैसे रह...
DrLakshman Jha Parimal
तुम्हें जन्मदिन मुबारक हो
gurudeenverma198
संसर्ग मुझमें
Varun Singh Gautam
जल से सीखें
Saraswati Bajpai
✍️बूढ़ा शज़र लगता है✍️
'अशांत' शेखर
माँ (ममता की अनुवाद रही)
Vijay kumar Pandey
धरना-प्रदर्शन की नियमावली (हास्य व्यंग्य)
Ravi Prakash
कैसे कहें हम
Kaur Surinder
आओ और सराहा जाये
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
ग़ज़ल --बनी शख़्सियत को कोई नाम-सा दो।
rekha mohan
मैं शर्मिंदा हूं
Shekhar Chandra Mitra
जैसी करनी वैसी भरनी
Ashish Kumar
💐💐तुम्हें देखा तो बहुत सुकून मिला💐💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
प्यार को हद मे रहने दो
Anamika Singh
■ वाणी वंदना के साथ बधाई
*Author प्रणय प्रभात*
वक्त की उलझनें
ज्ञानीचोर ज्ञानीचोर
गज़ल
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
आईना हाथ में अगर रखते
Dr fauzia Naseem shad
Loading...