Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

नारी

*नारी*

तुम भावों का अनुबंधन हो।
तुम नातों का अभिनंदन हो।

करुणा श्रध्दा प्रेम सिंधु तुम।
जगतीतल का केन्द्र बिन्दु तुम।
विश्व भुवन में तुम मधुवन हो।

तुम स्निग्ध स्पर्श हो रति का।
तुम औषध हर हृदय क्षति का।
नारी तुम पावन चिंतन हो।

परमेश्वर की अनुपम कृति तुम।
सर्व विदित सुंदर प्रकृति तुम।
नूतन युग का नव जीवन हो।

तुम सिया सी साधिका हो।
विरह दग्धा राधिका हो।
वनिते! जग का मूल्यांकन हो।

रत्नगर्भा मणीमयी तुम।
अति मृदु दृढ़ अतिशयी तुम।
संस्कृत भूतल का आंगन हो।

अंकित शर्मा’ इषुप्रिय’
रामपुर कलाँ, सबलगढ(मुरैना)

5 Likes · 3 Comments · 218 Views
You may also like:
मेरे पिता
Ram Krishan Rastogi
पिता
Buddha Prakash
✍️बगावत थी उसकी✍️
"अशांत" शेखर
अल्फाज़ ए ताज भाग-3
Taj Mohammad
जूते जूती की महिमा (हास्य व्यंग)
Ram Krishan Rastogi
सत्यमंथन
मनोज कर्ण
शेर
dks.lhp
सेतुबंध रामेश्वर
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
#15_जून
Ravi Prakash
साहब का कुत्ता (हास्य व्यंग्य कहानी)
दुष्यन्त 'बाबा'
बाबासाहेब 'अंबेडकर '
Buddha Prakash
दुनिया की रीति
AMRESH KUMAR VERMA
नव विहान: सकारात्मकता का दस्तावेज
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
ग्रीष्म ऋतु भाग ४
Vishnu Prasad 'panchotiya'
💐प्रेम की राह पर-24💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
विचलित मन
AMRESH KUMAR VERMA
पिता की सीख
Anamika Singh
✍️गर्व करो अपना यही हिंदुस्थान है✍️
"अशांत" शेखर
फूलो की कहानी,मेरी जुबानी
Anamika Singh
'माँ मुझे बहुत याद आती हैं'
Rashmi Sanjay
संकरण हो गया
सिद्धार्थ गोरखपुरी
पापा
सेजल गोस्वामी
उलझनें_जिन्दगी की
मनोज कर्ण
मुक्तक
AJAY PRASAD
Colourful Balloons
Buddha Prakash
सुबह - सवेरा
AMRESH KUMAR VERMA
मुकरियां __नींद
Manu Vashistha
//स्वागत है:२०२२//
Prabhudayal Raniwal
ऐसे थे मेरे पिता
Minal Aggarwal
बे-इंतिहा मोहब्बत करते हैं तुमसे
VINOD KUMAR CHAUHAN
Loading...