Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
Sep 18, 2017 · 1 min read

नारी -शक्ति

हे नारी
क्षुद्र नदियाँ नहीं हो तुम,,
तुम हो
अथाह,,अगाध जलनिधि
नयन-वारि की,,,
कभी
चिरनिद्रा सी शाँत,गंभीर,,
ज्वार-भाटे
नित उठते-गिरते
कभी
जिनमें तू तनहा
डूबती-तिरती –खाती गोते
उफ किए बिना
आँच न आने देती,,
अपने से जुड़ों पर,,
पार लगाती,
” या देवी सर्वभूतेषु
मातृरूपेण संस्थिता” को
अक्षरश: सिद्ध करती
हे ! शक्तिरूपा
हे नयन-वारि की
अथाह जलनिधि,,
नमस्तस्यै–नमस्तस्यै
नमो नम:।।

3 Comments · 354 Views
You may also like:
जिम्मेदारी और पिता
Dr. Kishan Karigar
अपनी आदत में
Dr fauzia Naseem shad
पिता
Dr. Kishan Karigar
धरती की अंगड़ाई
श्री रमण 'श्रीपद्'
समय का सदुपयोग
Anamika Singh
पितृ ऋण
Shyam Sundar Subramanian
फेसबुक की दुनिया
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
आदर्श पिता
Sahil
गंगा दशहरा
श्री रमण 'श्रीपद्'
बँटवारे का दर्द
मनोज कर्ण
रोटी संग मरते देखा
शेख़ जाफ़र खान
थोड़ी सी कसक
Dr fauzia Naseem shad
अबके सावन लौट आओ
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
कभी वक़्त ने गुमराह किया,
Vaishnavi Gupta
श्रेय एवं प्रेय मार्ग
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
न कोई जगत से कलाकार जाता
आकाश महेशपुरी
पंचशील गीत
Buddha Prakash
"मेरे पिता"
vikkychandel90 विक्की चंदेल (साहिब)
मांँ की लालटेन
श्री रमण 'श्रीपद्'
बूँद-बूँद को तरसा गाँव
ईश्वर दयाल गोस्वामी
तुम वही ख़्वाब मेरी आंखों का
Dr fauzia Naseem shad
✍️पढ़ना ही पड़ेगा ✍️
Vaishnavi Gupta
पिता
Deepali Kalra
बरसात
मनोज कर्ण
कुछ नहीं
Dr fauzia Naseem shad
देश के नौजवानों
Anamika Singh
मन
शेख़ जाफ़र खान
कैसा हो सरपंच हमारा / (समसामयिक गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
आत्मनिर्भर
मनोज कर्ण
हिय बसाले सिया राम
शेख़ जाफ़र खान
Loading...