Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Settings
Aug 10, 2016 · 1 min read

नहीं पता

मुझे मंज़िल का नहीं पता
मुझे रस्ते का नहीं पता

चला जा रहा हूँ बस सुर एक है…
मुझे जंगल का नहीं पता
मुझे मंगल का नहीं पता

अभी तो चलना शुरू किया है मैने…
मुझे सरल का नहीं पता
मुझे विरल का नहीं पता

मैं खुद में इक कीडे सा हूँ इस जहाँ में…
मुझे लहरों का नहीं पता
मुझे कहरों का नहीं पता

चाहत है बस उजाला ही उजाला हो…
मुझे सवेरे का नहीं पता
मुझे अँधेरे का नहीं पता

____________________________बृज

2 Likes · 3 Comments · 352 Views
You may also like:
जितनी मीठी ज़ुबान रक्खेंगे
Dr fauzia Naseem shad
हिन्दी साहित्य का फेसबुकिया काल
मनोज कर्ण
ज़िंदगी से सवाल
Dr fauzia Naseem shad
कभी ज़मीन कभी आसमान.....
अश्क चिरैयाकोटी
पिता
Ram Krishan Rastogi
पिता जी का आशीर्वाद है !
Kuldeep mishra (KD)
कोशिशें हों कि भूख मिट जाए ।
Dr fauzia Naseem shad
दहेज़
आकाश महेशपुरी
✍️कैसे मान लुँ ✍️
Vaishnavi Gupta
ऐ मां वो गुज़रा जमाना याद आता है।
Abhishek Pandey Abhi
ईश्वरतत्वीय वरदान"पिता"
Archana Shukla "Abhidha"
रेलगाड़ी- ट्रेनगाड़ी
Buddha Prakash
माखन चोर
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
एक कतरा मोहब्बत
श्री रमण 'श्रीपद्'
प्यार
Anamika Singh
कौन दिल का
Dr fauzia Naseem shad
✍️बड़ी ज़िम्मेदारी है ✍️
Vaishnavi Gupta
मेरी लेखनी
Anamika Singh
राम घोष गूंजें नभ में
शेख़ जाफ़र खान
ख़्वाब सारे तो
Dr fauzia Naseem shad
आपसा हम जो दिल
Dr fauzia Naseem shad
मेरी अभिलाषा
Anamika Singh
दो जून की रोटी
Ram Krishan Rastogi
बस एक निवाला अपने हिस्से का खिला कर तो देखो।
Gouri tiwari
क्यों भूख से रोटी का रिश्ता
Dr fauzia Naseem shad
पिता
Meenakshi Nagar
धरती की अंगड़ाई
श्री रमण 'श्रीपद्'
फीका त्यौहार
पाण्डेय चिदानन्द
मत रो ऐ दिल
Anamika Singh
बुध्द गीत
Buddha Prakash
Loading...