नसीब……………..

छोडो ये रूठने मनाने की गुस्ताखियां
नफरत की आग में कही खुशियो के पल जाया न हो !
जी भर के कर लो आज दिल की बाते
क्या पता आने वाले पल के नसीब में ये पल हो न हो !!

!
!
!
डी. के. निवातिया______@

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