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30 Sep 2016 · 1 min read

धर्म निभाता चल

मुक्तक
सत्य अहिंसा प्रेम धर्म हैं मन से इन्हें निभाता चल।
पर जो दंभी कष्ट प्रदायक उनका मान नवाता चल।
सब कालों में एक धर्म से न्याय कहाँ हो पाता है।
शास्त्र शस्त्र जब जो उत्तम हो वही नीति अपनाता चल।
अंकित शर्मा ‘इषुप्रिय’
रामपुर कलाँ,सबलगढ(म.प्र.)

Language: Hindi
1 Like · 2 Comments · 463 Views
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