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धरती से मिलने को बादल जब भी रोने लग गया।

मुक्तक- बरसात

धरती से मिलने को बादल जब भी रोने लग गया।
आंसुओं से भीग कर धरती का दामन भर गया।
लोग कहते हैं सभी बरसात का मौसम इसे,
प्यार में धरती के बादल, रोते रोते मर गया।

……. प्रेमी
Good morning 🌹🙏

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