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1 Aug 2016 · 1 min read

धरती माँ

धरती धर ती कितना बोझा
नहीं कभी हमने ये सोचा

भेदभाव के बिना सभी को
पाला ज्यों घर की अम्माँ ने
किसको पालूं किसको छोडूं
कभी नहीं सोचा वसुधा ने

और एक हम, तू-तू मै-मै
ये तेरा ये मेरा करते
दूसरों की परवरिश क्या
अपने ही माँ बाप अखरते |

भौतिकता अब संबंधों को
किस पर क्या है इससे जोड़े
इज्जत की खानेवालों से
पास पड़ोसी भी मुंह मोड़ें |

वसुधा जैसा करें ह्रदय को
मिलजुल कर बांटें सम्मान
एक दूसरे का हित सोचें
विश्व शांति का रचें विधान |

Language: Hindi
Tag: कविता
1 Comment · 354 Views
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