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16 Aug 2021 · 4 min read

दोहा-समीक्षा 248वीं दिनांक-16-8-2021

*248- आज की समीक्षा* *दिनांक 16-8-2020*

बिषय- *पठौनी*

आज पटल पै भौतइ नोने दोहा डारे गये है। सबइ जनन ने बढिया कोसिस करी है। पैला तौ सबइ जनन खौ भौत नोनौ लिखवे पै हमाइ मुलकन बधाई।
आज दाऊ जरूरी काम से इंदौर गये है इसलिए उनकी तरफ से आज हम काम चलाऊ समीक्षा लिख रय है।
*1* *श्री *प्रदीप खरे,मंजुल* जू* ने सबसें पैला दोहा डारो उनने लिखो कै -ऐसे पटौनी ल्याय चइए जी खों देख के पडौसी बडवाई करन लगे। अच्छो लिखौ है बधाई।
मैया बोली सुन इतै, हाट बजरै जाऔ।
बिटिया घर पौचाउनें, कछु पठौनी ल्याऔ।।
खेल खिलौनन सें सजी, कजन पठौनी जाय।
पुरा परौसी देखकें, मन भारी हरसाय।

*2*- **श्री अशोक पटसारिया जू* भौत नौनो लिखो वे दोहन में बता रय कै पठौनी में का का दओ जात है। बधाई।
सूपा बिजना दौरिया, पापर बरीं अचार।
बांद पठौनी भेज तइ,मौडी खां ससुरार।।

धरत पठौनी बांद कें,बांद सगुन की गांठ।
बउ बिटिया जाबै कितउ,भेजत नइयां ठांठ।।

*3* *श्री गोकुल प्रसाद यादव , नन्हीं-टेहरी(बुडे़रा)* जू ने किसन अरु सुदामु कौ भौय नोनो वरनन करो है। बधाई।
दैबे गय ते सावनी,मिली पठौनी येंन।
बिजना सूपा दौरिया,चाँवर पिसिया रेंन।।
रीते हाँतन लौटतन, हते भौत बेचैंन।
देख पठौनी किशन की,भरे सुदामा नैंन।।

*4* *श्री शील शास्त्री , ललितपुर* जू लिखत है बिटिया की विदाई में जितैक देव उतैक कम है जब हृदय कौ टुकड़ा सौप दओ तो अब का बचो देवे खौं। भौत नोने भाव है बधाई।
जी दिन बिटिया विदा भई, सूनौ हो गव संसार ।
हियौ काड़कें सौप दव, अब का दै दएं उपहार ।।
जैसईं सावन बीत जै, साजन लैजें ससुरार ।
पठौनी-पुटरियन में बंदें, पापर, बरीं, अचार ।

*5* *श्री जयहिन्द सिंह जयहिन्द,पलेरा* से लिखत है श्रीराम के विवाह के टैम की पठौनी कौ नोनो चित्रण दोहन में करो है। बधाई
देत पठौनी अबध खों,रुच-रुच कें मिथलेस।
दान-दायजौ सबइ है,रखो न कौनउँ सेस।।
देत पठौनी मायकौ,चलत बिदा के संग।
लगै सबै हम बाँध दें,देतन उठत उमंग।।

*6* *श्री गुलाब सिंह यादव भाऊ लखौरा टीकमगढ़* सें पैला के टैम पठौनी बैलगाड़ी में धर के जात हती नोनो लिखों है बधाई।
मिली पठौनी सब कुछ ,लुवाबै गये जे पैल।
अब कछु नई आऊत है ,मिट गये गाड़ी बैल ।।
गाड़ी में धर देत ते,सिपी देवल और दार।
सूपा बिजना दोईया ,दई पठौनी डार ।।

*7* *श्री रामेश्वर प्रसाद गुप्त इंदु बडागांव झांसी*.उप्र.ने जनकपुर में जानकी की विदाई के टैम कौ उमदा वरनन करो है।
जनक सें भेजें जब, लाडली खों ससुराल।
देवन सें बार-बार, मनौती मनाउतीं।।
जनकपुर नारियाँ, करतीं विदाई ‘इंदु’।
दान मान दे दहेज, पठौती पठाउतीं।।

*8* *राजीव नामदेव “राना लिधौरी” टीकमगढ़* से पाप-पुण्य की पठौनी बता रहे है दोहो में दरसन है।
पाप पठौनी बांद के,ऊपर जाते लोग।
कर्मो का फल पात है,रये बुढ़ापौं भोग।।
ल्यात पठौनी कैसई,टका नई है पास।
बिटिया ल्यावे जान है, रतई भौत उदास।।
***
*9* *श्री परम लाल तिवारी, खजुराहो* से कत है कै नोनी पटौनी भेजो तो सास खुश हो जात है। उमदा दोहे रचे बधाई
करो इकट्ठी जोर के,कछु पठौनी नेक।
फिर करियो बिटिया विदा,अबे छोड़ दो टेक।।
मिले पठौनी ठीक जब,खुशी रहत है सास।
नहि तो बकबक करत बहु,बहुयें रहत उदास।।

*10* *श्री एस आर सरल, टीकमगढ़* से सांसी कै रय कै आजकाल तो नगद नारायण की पठोनी होत है। शानदार दोहे है बधाई।
बिटिया की करतन बिदा,आँखन असुआ आत।
दार चना चाँउर पिसी, कछू पठौनी जात।।
‘सरल’ पठौनी की जगा,अब नगदी दइ जात।
चौखी नगदी के बिना, गैल गैल कुल्लात।।

*11* *श्री कल्याण दास साहू “पोषक’,पृथ्वीपुर,निवाडी़* जू ने भोत नोनै दोहा रचे हर मां-बाप अपनी हैसियत के अनुसार पठौनी देत है।सभी दोहे बढ़िया है। बधाई
मौडी़ की होवै विदा , देत खूब धन-धान्य ।
इयै पठौनी ही कहत , परम्परा शुभ मान्य ।।
बिना पठौनी की विदा , नही करत है कोउ ।
जी की जितनी हैंसियत , बाँदत-छोरत सोउ ।।

*12* *श्री प्रभु दयाल श्रीवास्तव पीयूष टीकमगढ़* जू भौत बेहतरीन बुंदेली शब्दों का प्रयोग करते हैं बधाई।
आइ पठोंनीं बांद कें,चांवर देउल उर दार।
छबला सूपा दौरिया ,पापर बरीं अचार।।
अलफा लै लव ससुर खों,सासो खों इकलाइ।
बांद पठोंनी सान सें ,बहू सासरें आइ।।

*13* *शोभाराम दाँगी नंदनवारा* ने उमदा दोहे रचे है प्रेम पठौनी की बात लिख रय है। बधाई।
भेजत बिटिया जो कोउ, प्रेम पठौनी देत ।
पै लरका वारे कछु जनें, तौऊ उरानौं देत ।।
प्रेम पठौनी जो गहै, बेटी सुक में रांय ।
प्रेम पठौनी के बिना, फीके सब पर जांय ।।

*14* *श्रीअरविन्द श्रीवास्तव,भोपाल* से करम पठौनी की बात लिखते हैं । सुंदर दोहे रचे है। बधाई
बिदा करत जब कोउ खौं, बाँद देत सौगात,
जाती बेराँ देत सो, उयै पठौनी कात ।

करे करम रत गाँठ में, और जात सब छूट,
पुण्य-पठौनी के बिना, जात विधाता रूठ ।

*15* *श्री संजय श्रीवास्तव, मवई दिल्ली* से प्रेम पठौनी की लेके चलवे की बात कर रय है। बधाई
प्रेम, मान- सम्मान सें,भरी पठौनी आज।
दऔ करेजो काड़ कें, भली करौ महराज।।
पुण्य पठौनी प्रेम की,लैकें चलियो संग।
ध्यान, धरम, सदकरम सब, हों जीवन के अंग।।

*16* *डॉ रेणु श्रीवास्तव भोपाल* ने भौत बेहतरीन दोहे रचे बधाई।
धरम खूब सब कोउ करौ, बांध पठौनी जांय।
ईश्वर के दरवार में,जेउ तो देखो जाय।।
बहुधन नोनी आ गई,बांद पठौनी साथ।
सास ननद खुश होत हैं, ऊंचो हो गौ माथ।।

*17* *श्री राजगोस्वामी दतिया* से लिखत है कै पठौनी में मिले व्यंजन अरु अचार की महिमा बता रहे है। बधाई।
बाध पठौनी चल दिये संग मे लै के नार ।
खोल पुटरियन मे मिली पुरी पपरिया दार ।।
बेला आइ बिदाइ की भेट मिले कलदार ।
मिली पठौनी संग मे व्यंजन बिबिध अचार ।।
***
आप सबइ ने पने-पने दोहा पटल पै डारे हम भौत आभारी हैं ऐसइ बुंदेली साहित्य कौ नओ भंडार भरत रइयो।
*जय बुंदेली,जय बुन्देलखण्ड, जय भारत*
*- राजीव नामदेव राना लिधौरी टीकमगढ़*
*अध्यक्ष- मप्र लेखक संघ*, मोबाइल -9893520965

Language: Hindi
Tag: लेख
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