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दृश्य प्रकृति के

निर्झर,
पर्वत के पद से,
झर-झर करते,
गिरते;
नभचर,
झुंड में,
कलरव करते,
उड़ते;
वनचर,
इधर-उधर,
चौकड़ी भरते,
दौड़ते;
तरुवर,
हरे-भरे,
मंद हवा में,
लहराते;
सुन्दर,
कीट-पतंगे,
फूलों पर,
मंँडराते;
मनोहर,
दृश्य प्रकृति के,
हृदय खींच,
ले जाते।

मौलिक व स्वरचित
©® श्री रमण
बेगूसराय (बिहार)

5 Likes · 7 Comments · 139 Views
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