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Apr 27, 2022 · 1 min read

दिलदार आना बाकी है

यूं उम्र दराज न कहो, अभी बहार आना बाकी है,
चमन मे फूल, समंदर में ज्वार आना बाकी है।
यूं ही नहीं गुजारनी है जिन्दगी मुफ़लिसी मे,
करनी है दिल्लगी,अभी दिलदार आना बाकी है।
✍️जटाशंकर”जटा”

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