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दर्द हमें पीना ही होगा

(दुनिया में करोना से लाखों लोग दुनिया छोड़ गए हैं। उनके परिजनों को समर्पित रचना)

छोड़ गए प्रियजन दुनिया , दर्द हमें पीना होगा
बचा हुआ जो जीवन , प्रियजन के बिना विताना होगा
हिम्मत से सब सहना होगा, जीवन है जीना ही होगा
नहीं लौटकर आता कोई, यादें दिल में बसाना होगा
गम का प्याला पीना होगा, जीवन है जीना ही होगा
छोड़कर दुनिया जो जाते हैं, वापिस कभी नहीं आते
ताकत पैसे और डाक्टर, साधन नहीं बचा पाते
आखिर जब तक जीवन है, जीवन तो जीना ही होगा
आनी जानी दुनिया है, एक दिन सबको जाना है
अपना-अपना रोल अदाकर, माटी में मिल जाना होगा
बची हुई सांसो को लेकर, हमको भी तो जाना होगा
मरती रहती है काया, जीव नहीं मरता है
आज यहां कल वहां, चोला वस्त्रों की तरह बदलता है
आना-जाना क्रम जीवन का, जीवन ऐंसे ही चलता है
गम और दर्द भुलाना होगा , दर्द से आगे जाना होगा
उलझन को सुलझाना होगा, घर संसार चलाना होगा
आगे कदम बढ़ाना होगा, जीवन है जीना ही होगा
सुरेश कुमार चतुर्वेदी

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