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8 Feb 2023 · 1 min read

तेज दौड़े है रुके ना,

तेज दौड़े है रुके ना,
आज बिलकुल ये मुड़े ना,
मन ये बहका-सा हिरण है !
बादलों को चीर आई
घोर तम से मुक्ति पाई
भोर की आशा किरण है !!
— महावीर उत्तरांचली

1 Like · 71 Views
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Books from महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali

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