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Sep 29, 2017 · 1 min read

तृषा …

तृषा …

श्वास श्वास के आलिंगन का थोड़ा तुम अभिमान करो l
विरह पलों से मौन सुधा का तुम न यूँ अपमान करो l
नैन विलास की मधुर विभावरी लौट के फिर न आये –
अपने अधरों से अधरों की तृषा का तुम संधान करो l

सुशील सरना

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