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28 Jun 2022 · 1 min read

तू है तेरे अन्दर।

कस्तूरी मृग की तरह इधर उधर भटकता है।
तू है तेरे अन्दर फिर क्यों ना खुदको देखता है।।

✍️✍️ ताज मोहम्मद ✍️✍️

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