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Apr 13, 2022 · 1 min read

तुम मेरे वो तुम हो…

तुम मेरी कोई,
उम्मीद या तमन्ना नहीं हो,
हाँ .. तुम मेरी वो प्रेरणा हो..
जैसे जिंदा रहने के लिए साँस लेते हैं ना
उसी तरह..

तुम मेरी कोई,
बचकानी बात या जिद्द नहीं हो,
हाँ .. तुम मेरा वो आत्मविश्वास हो..
जिस से हर बुरे वक्त के जाल से
खुदको सुरक्षित बाहर निकाल सकूँ..

तुम मेरा कोई
आवारापन या लापरवाही नहीं हो,
हाँ … तुम मेरी वो दहलीज हो,
जिसे दुनिया की हर बूरी बलाएँ
मेरे सामने मुझसे पहले तुम्हें पाएँ
एक लक्ष्मणरेखा की तरह..

तुम मेरा कोई
झूठ या कपट नहीं हो,
हाँ … तुम मेरा वो सत्य हो,
जिसके सामने मेरे अतित कोई अर्ध सत्य मेरा शिश झुका ना सकें…

तुम मेरी कोई
घुटन या इंतजार नहीं हों,
हाँ … तुम मेरा वो अस्तित्व हो,
जो मुझसे जुदा होकर भी कभी रूँसवा हो ना सकें…

तुम मेरा कोई
कपट या मतलब नहीं हों,
हाँ … तुम वो अपनापन हो,
जो खुद को दर्द में रख भी मेरे मुस्कुान झलक बनकर जिए…

तुम मेरा वो तुम हो …
जो तुम्हारें बिना मेरा सर्वस्व अधूरा हैं…
#ks

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