Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
16 Feb 2023 · 1 min read

💐अज्ञात के प्रति-139💐

तुम मुस्कुराओ मुझे यूँ ही बख़ूबी जलाओ,
चराग़ को अँधेरे से कोई शिकायत नहीं है।

©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Hindi
61 Views
Join our official announcements group on Whatsapp & get all the major updates from Sahityapedia directly on Whatsapp.
You may also like:
गीत-1 (स्वामी विवेकानंद जी)
गीत-1 (स्वामी विवेकानंद जी)
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
एक सन्त: श्रीगुरु तेग बहादुर
एक सन्त: श्रीगुरु तेग बहादुर
Satish Srijan
■ आज का मुक्तक / काश....
■ आज का मुक्तक / काश....
*Author प्रणय प्रभात*
माफ करना, कुछ मत कहना
माफ करना, कुछ मत कहना
gurudeenverma198
कविता
कविता
Vandana Namdev
रिश्ते रिसते रिसते रिस गए।
रिश्ते रिसते रिसते रिस गए।
Vindhya Prakash Mishra
उसने मुझको बुलाया तो जाना पड़ा।
उसने मुझको बुलाया तो जाना पड़ा।
सत्य कुमार प्रेमी
मुझसे पूछा उसने तुमने मां पर भी कुछ लिखा
मुझसे पूछा उसने तुमने मां पर भी कुछ लिखा
कवि दीपक बवेजा
💐प्रेम कौतुक-214💐
💐प्रेम कौतुक-214💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
माँ कहने के बाद भला अब, किस समर्थ कुछ देने को,
माँ कहने के बाद भला अब, किस समर्थ कुछ देने को,
pravin sharma
लौट आयो
लौट आयो
Dr. Rajiv
मुस्कुराना चाहता हूं।
मुस्कुराना चाहता हूं।
अभिषेक पाण्डेय ‘अभि ’
रूपसी
रूपसी
Prakash Chandra
देखकर उन्हें देखते ही रह गए
देखकर उन्हें देखते ही रह गए
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी"
मेरा पिता! मुझको कभी गिरने नही देगा
मेरा पिता! मुझको कभी गिरने नही देगा
अनूप अम्बर
सदियों से रस्सी रही,
सदियों से रस्सी रही,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
"वाह रे जमाना"
Dr. Kishan tandon kranti
खंड 8
खंड 8
Rambali Mishra
बिन मौसम के ये बरसात कैसी
बिन मौसम के ये बरसात कैसी
Ram Krishan Rastogi
Girvi rakh ke khud ke ashiyano ko
Girvi rakh ke khud ke ashiyano ko
Sakshi Tripathi
आस लगाए बैठे हैं कि कब उम्मीद का दामन भर जाए, कहने को दुनिया
आस लगाए बैठे हैं कि कब उम्मीद का दामन भर जाए, कहने को दुनिया
Shashi kala vyas
जीत वो सकते हैं कैसे
जीत वो सकते हैं कैसे
Dr fauzia Naseem shad
हम है वतन के।
हम है वतन के।
Taj Mohammad
हम मुहब्बत कर रहे थे
हम मुहब्बत कर रहे थे
shabina. Naaz
जीवन की बेल पर, सभी फल मीठे नहीं होते
जीवन की बेल पर, सभी फल मीठे नहीं होते
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
तेरे संग मैंने
तेरे संग मैंने
लक्ष्मी सिंह
*जीवन-साथी (कुंडलिया)*
*जीवन-साथी (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
आज का बचपन
आज का बचपन
Buddha Prakash
बह रही थी जो हवा
बह रही थी जो हवा
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
कालजई रचना
कालजई रचना
Shekhar Chandra Mitra
Loading...