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12 Nov 2022 · 1 min read

🍀🐦तुम्हारा हर हर्फ़ मलंग सा🐦🍀

##कल बात करेंगे##

तुम्हारा हर हर्फ़ मलंग सा,
मैं तो उसका इशारा भर हूँ,
रिवायत से भरे बोल न कहे,
तुमसे पहले न किसी को देखा,
पसंद तो फ़कत जहन है,
जो दुआ सी लगे अहम है,
वो चले सावन के पवन सा,
तुम्हारा हर हर्फ़ मलंग सा,
मैं तो उसका इशारा भर हूँ।।1।।
मेरी अस्काम को जलाना सही,
यह दूरी अब तक किस बजूद से रही,
मुझे लुटाते रहे ज़माने भर में,
तुम्हें अफ़साना कहना बाज़िब न है,
तुम्हारा नज़ारा चन्दन सा,
तुम्हारा हर हर्फ़ मलंग सा,
मैं तो उसका इशारा भर हूँ,।।2।।
उस दम को बेदम ही कहेंगे,
जो किसी का ईमान ही बिगाड़े,
हर इंसान जी रहा है जहाँ में,
किसी न किसी के सहारे,
उनका अंदाज पावन सा,
तुम्हारा हर हर्फ़ मलंग सा,
मैं तो उसका इशारा भर हूँ,।।3।।
शौक़ न बचा तुम्हारे सिवाय,
वो बहते रहे सागर की तरह,
मैं डूबता रहा, डूबता रहा,
किनारा खोजता-खोजता रहा,
वो तो महकने लगे चमन सा,
तुम्हारा हर हर्फ़ मलंग सा,
मैं तो उसका इशारा भर हूँ,।।4।।

©®अभिषेक: पाराशरः

मलंग-आनन्द मय साधु
रिवायत-सुने सुनाये शब्द
फ़कत-सामान्य,ज़हन-स्वभाव,
अस्काम-गलतियाँ, बाजिब-सत्य
चमन-फूलों की क्यारी

Language: Hindi
Tag: गीत
48 Views
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