Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

तिलका छंद “युद्ध”

गज अश्व सजे।
रण-भेरि बजे।।
रथ गर्ज हिले।
सब वीर खिले।।

ध्वज को फहरा।
रथ रौंद धरा।।
बढ़ते जब ही।
सिमटे सब ही।।

बरछे गरजे।
सब ही लरजे।।
जब बाण चले।
धरणी दहले।।

नभ नाद छुवा।
रण घोर हुवा।
रज खूब उड़े।
घन ज्यों उमड़े।।

तलवार चली।
धरती बदली।।
लहु धार बही।
भइ लाल मही।।

कट मुंड गए।
सब त्रस्त भए।।
धड़ नाच रहे।
अब हाथ गहे।।

शिव तांडव सा।
खलु दानव सा।।
यह युद्ध चला।
सब ही बदला।।

जब शाम ढ़ली।
चँडिका हँस ली।।
यह युद्ध रुका।
सब जाय चुका।।
============

तिलका छंद विधान –

“सस” वर्ण धरे।
‘तिलका’ उभरे।।

“सस” = सगण सगण = 6वर्ण प्रति चरण की वर्णिक छंद।
(112 112),
दो-दो चरण समतुकांत
***************

बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’ ©
तिनसुकिया

41 Views
You may also like:
आखिरी कोशिश
AMRESH KUMAR VERMA
“ राजा और प्रजा ”
DESH RAJ
कुण्डलिया
शेख़ जाफ़र खान
🌺प्रेम की राह पर-54🌺
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
इन्सान
Seema Tuhaina
ग़ज़ल
Mahendra Narayan
ब्रेक अप
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
चाल कुछ ऐसी चल गया कोई।
सत्य कुमार प्रेमी
पितृ स्तुति
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
✍️कांटने लगते है घर✍️
'अशांत' शेखर
💐प्रेम की राह पर-33💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
खुशियों भरे पल
surenderpal vaidya
कातिलाना अदा है।
Taj Mohammad
पिया मिलन की आस
Kanchan Khanna
पारिवारिक बंधन
AMRESH KUMAR VERMA
✍️जंग टल जाये तो बेहतर है✍️
'अशांत' शेखर
आज की नारी हूँ
Anamika Singh
*#महापुरुषों_के_पत्र* (संस्मरण)
Ravi Prakash
संकुचित हूं स्वयं में
Dr fauzia Naseem shad
जितना भी पाया है।
Taj Mohammad
पिता
Ray's Gupta
ऐ जिन्दगी
Anamika Singh
माई री [भाग२]
Anamika Singh
मैं हूँ किसान।
Anamika Singh
ए- वृहत् महामारी गरीबी
AMRESH KUMAR VERMA
मेरी रातों की नींद क्यों चुराते हो
Ram Krishan Rastogi
✍️राहे हमसफ़र✍️
'अशांत' शेखर
महापंडित ठाकुर टीकाराम (18वीं सदीमे वैद्यनाथ मंदिर के प्रधान पुरोहित)
श्रीहर्ष आचार्य
जाने कहां वो दिन गए फसलें बहार के
Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI
तोड़कर तुमने मेरा विश्वास
gurudeenverma198
Loading...