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तितर-बितर

अपने हर एक लहज़े में ,तेरा जिकर कौन करता है।
जरा ये भी बता के तेरी फिकर, अब कौन करता है।
गलतफहमी पाल के पड़े हो जनाब ये बता दो जरा,
ख्वाबों को तुम्हारे अब ,तितर-बितर कौन करता है।
– सिद्धार्थ

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