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तालियाँ

तालियाँ बजती है जनाब ।
सड़कों पर ,
तथाकथित दरबारों में,
सभाओं में,
क्रीड़ा -स्थलों में ।
पता नही,
और कहाँ कहाँ ।
प्यारे ! भाइयों, बहनों !
परन्तु शायद ही-
तालियाँ बजती हैं
अब,कभी-कभी ,
आपके घरों में भी ।
नरेन्द्र

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