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7 Feb 2023 · 1 min read

तांका

अजय चाकवते -९४०४९९५६२४

घोर अंधार,
रातकीड्या ची किर्र _ _ _ _
आत्म प्रकाश
तू ना घे अवकाश
चाल रे सावकाश…. . . . .

लक्ष मिळेल,
तुला ही हमखास,
ना हो उदास
निज तत्वा चा ध्यास
नित्य कर प्रयास

प्रवासी तू रे
पाथेय गुरू वाणी,
यात्रा दूर ची
होऊन आत्म ज्ञानी
कृती जण कल्याणी

एकांत वास,
ना परिग्रहा आस
आत्म विकास
ना इंद्रियचा दास
होई अजेय खास

अजय चाकवते

Language: Marathi
2 Likes · 156 Views
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