Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
Sep 5, 2017 · 1 min read

तलाश

राह मिल नहीं रहा ,
भटक रहे है सब
रोशनी की तलाश में,
दिन के बाद रात
रात्रि के बाद प्रभात
हर लम्हा सिर्फ
एक खोज ऊजाले की,
फिर भी कमबख्त
हाथ आती नहीं रोशनी,
शायद यह तलाश अब
जारी रहेगा ताउम्र… !

168 Views
You may also like:
वेदों की जननी... नमन तुझे,
मनोज कर्ण
आंखों में कोई
Dr fauzia Naseem shad
बेजुबान और कसाई
मनोज कर्ण
जीवन में
Dr fauzia Naseem shad
घनाक्षरी छंद
शेख़ जाफ़र खान
जंगल में कवि सम्मेलन
मनोज कर्ण
संत की महिमा
Buddha Prakash
जीवन की प्रक्रिया में
Dr fauzia Naseem shad
✍️यूँही मैं क्यूँ हारता नहीं✍️
'अशांत' शेखर
आदर्श पिता
Sahil
इस तरह
Dr fauzia Naseem shad
✍️काश की ऐसा हो पाता ✍️
Vaishnavi Gupta
✍️अकेले रह गये ✍️
Vaishnavi Gupta
गुलामी के पदचिन्ह
मनोज कर्ण
नदी को बहने दो
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
मेरा गुरूर है पिता
VINOD KUMAR CHAUHAN
"बदलाव की बयार"
Ajit Kumar "Karn"
जय जगजननी ! मातु भवानी(भगवती गीत)
मनोज कर्ण
तपों की बारिश (समसामयिक नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
मिट्टी की कीमत
निकेश कुमार ठाकुर
काश मेरा बचपन फिर आता
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
रूखा रे ! यह झाड़ / (गर्मी का नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
एसजेवीएन - बढ़ते कदम
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
गर्म साँसें,जल रहा मन / (गर्मी का नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
.✍️वो थे इसीलिये हम है...✍️
'अशांत' शेखर
वक़्त किसे कहते हैं
Dr fauzia Naseem shad
नित नए संघर्ष करो (मजदूर दिवस)
श्री रमण 'श्रीपद्'
हम और तुम जैसे…..
Rekha Drolia
पापा जी
सत्येन्द्र पटेल ‘प्रखर’
ख़्वाब सारे तो
Dr fauzia Naseem shad
Loading...