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13 Feb 2023 · 1 min read

💐अज्ञात के प्रति-104💐

तन्हा हूँ बहुत तन्हा,हवाओं उनसे कहो,
क्या दिल की खिड़कियाँ बन्द कर दीं।

©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Hindi
76 Views
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