Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 Jun 2022 · 1 min read

झुलसता पर्यावरण / (नवगीत)


एक
चिंगारी उठी है
इस शहर से
उस शहर तक ।

बाँस दंभी
ठन गए दो ,
परस्पर
टकरा गए जो ।
छा चुकीं हैं
गर्द चिनगीं ,
झुलसतीं हैं
ज़र्द फुनगीं ।

कूप
मौतों का खुदा है
इस डगर से
उस डगर तक ।

जल रही हैं
पत्तियाँ भी,
धधकतीं हैं
डालियाँ भी ।
सूखती है
नदी असमय,
शुदी में ज्यों
वदी असमय ।

हृदय
जलता रुआँ जैसा
इस पहर से
उस पहर तक ।

उठो ! साथी
जगो ! माली,
हाथ में
लेकर कुदाली ।
खोद भू
पौधे लगाओ,
बाग ये
फिर से सजाओ ।

जंगलों
से दुआ उट्ठी
गाँव,खेड़ों औ’
नगर तक ।

एक
चिंगारी उठी है
इस शहर से
उस शहर तक ।

— ईश्वर दयाल गोस्वामी ।
छिरारी(रहली),सागर
मध्यप्रदेश ।

Language: Hindi
Tag: गीत
10 Likes · 8 Comments · 151 Views
You may also like:
याद रखना मेरी यह बात।
Anamika Singh
हिंदी दोहा-टोपी
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
गाँव के दुलारे
जय लगन कुमार हैप्पी
=*तुम अन्न-दाता हो*=
Prabhudayal Raniwal
पैरहन में बहुत छेद थे।
Taj Mohammad
शाम सुहानी
लक्ष्मी सिंह
"भीमसार"
Dushyant Kumar
जीवन जीत हैं।
Dr.sima
जर्जर विद्यालय भवन की पीड़ा
Rajesh Kumar Arjun
Serious to clean .
Nishant prakhar
"सावन-संदेश"
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
वक्त दर्पण दिखा दे तो अच्छा ही है।
Renuka Chauhan
तमाल छंद में सभी विधाएं सउदाहरण
Subhash Singhai
ना चीज़ हो गया हूँ
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
धार्मिक बनाम धर्मशील
Shivkumar Bilagrami
घर
पंकज कुमार कर्ण
*बगिया जोखीराम में श्री राम सत्संग भवन का निर्माण :...
Ravi Prakash
मेरी माँ
shabina. Naaz
अब तो ज़ख्मो से रिश्ता पुराना हुआ....
डॉ. अनिल 'अज्ञात'
प्रेमी और प्रेमिका की मोबाइल पर वार्तालाप
Ram Krishan Rastogi
जाने क्या-क्या ? / (गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
कबीर की ललकार
Shekhar Chandra Mitra
धरती अंवर एक हो गए, प्रेम पगे सावन में
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
हमारा घर छोडकर जाना
Dalveer Singh
चोरी चोरी छुपके छुपके
gurudeenverma198
✍️मेरी जान मुंबई है✍️
'अशांत' शेखर
*** चल अकेला.......!!! ***
VEDANTA PATEL
मंगलसूत्र
संदीप सागर (चिराग)
हमें हटानी है
surenderpal vaidya
मौत की हक़ीक़त है
Dr fauzia Naseem shad
Loading...