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29 Mar 2018 · 1 min read

सदा बढता है,वह ‘नायक’, अमल बन ताज ठुकराता|

जो नर-मन खुशमिजाज़ी का सुघड़ अंदाज बन जाता |
उसी जीवन में आनंदी भरा गुणराज आ जाता |
न जाने आगे-पीछे का, निरंतर आज में रहकर |
सदा बढता है,वह ‘नायक’ ,अमल बन ताज ठुकराता|
…………………………………………………….
Pt Brijesh Nayak

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
1 Like · 1 Comment · 488 Views
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