Jan 23, 2020 · 1 min read

जो दोगे खून का कतरा

लहु का मांग के कतरा जो सीना तान बैठा था
नही मालूम था सबको जो उसने मान बैठा था।
ये जिद थी जान देकर भी वतन आजाद करना है
तभी तो जान लेने की भी मन मे ठान बैठा था।

वही सुभाष हैं जिसनें दिया “जय हिंद” का नारा
जो दोगे खून का कतरा मिलेगा देश ये प्यारा।
वो जीना भी क्या जीना है जो लड़के जीत ना जाए
ये जंजीरें गुलामी की मिटा दो देश के यारा।
जटाशंकर”जटा”
२३-०१-२०२०

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